🍬 जब बात मिठास की हो, तो याद करें भारत की अनमोल मिठाइयों को:
भारत वह देश है जहाँ हर त्यौहार, हर परंपरा, हर भावनात्मक क्षण मिठाई के बिना अधूरा माना जाता है। और मिठाइयों की बात करें तो देखिए, ये सिर्फ़ कुछ नाम हैं:
✅ परंपरागत मिठाइयाँ:
- बूंदी
- खीर
- बर्फी
- घेवर
- चूरमा
- रबड़ी
- रेबड़ी
- फीणी
- जलेबी
- आम रस
- कलाकंद
- रसगुल्ला
- रसमलाई
- नानखटाई
- मावा बर्फी
- पूरण पोली
- मगज पाक
- मोहन भोग
- मोहन थाल
- खजूर पाक
- मीठी लस्सी
- गोल पापड़ी
- बेसन लड्डू
- शक्कर पारा
- मक्खन बड़ा
- काजू कतली
- सोहन हलवा
- दूध का शर्बत
- गुलाब जामुन
- गोंद के लड्डू
- नारियल बर्फी
- तिलगुड़ लड्डू
- आगरा का पेठा
🔢 और भी:
- 50 तरह के पेड़े
- 50 तरह की गज़क
- 20 तरह का हलवा
- 20 तरह के श्रीखंड
…ये तो बस शुरुआत है। भारत के हर राज्य, हर गांव की अपनी खास मिठाई है।
🍫 और अब ज़रा सोचिए…
आज जब हम “कुछ मीठा हो जाए” कहते हैं, तो हाथ में थमाई जाती है…
👉 “चॉकलेट”
👉 “कैडबरी”
वो भी:
- 3 महीने पुरानी
- 5% प्रिज़रवेटिव के साथ
- केमिकल युक्त, पैक्ड, थोक में बनी हुई
- बिना किसी पारंपरिक भाव के
क्या यही है हमारी मिठास की पहचान?
विचारणीय प्रश्न
भारत जैसे देश में जहाँ सैकड़ों प्रकार की ताज़ा, शुद्ध और स्वादिष्ट मिठाइयाँ बनाई जाती हैं, वहाँ त्योहारों पर चॉकलेट देना कितना उचित है?
रक्षाबंधन, एक पवित्र बंधन का त्योहार – जिसमें बहनें अपने भाई को राखी बांधती हैं और प्रेमपूर्वक मिठाई खिलाती हैं। क्या उसमें चॉकलेट फिट बैठती है?
🌿 अब निर्णय आपको करना है!
इस रक्षाबंधन:
- विदेशी नहीं, देशी मिठाइयाँ अपनाएं
- कैडबरी नहीं, कलाकंद बांटें
- प्रिज़रवेटिव नहीं, ताज़ा लड्डू
- पैकेजिंग नहीं, पारंपरिक मिठास
🎁 “कुछ मीठा हो जाए” – भारत की मिट्टी से निकली मिठाइयों के साथ।
🛑 अब समय है सोचने का, चुनने का, और संस्कृति से जुड़ने का।
स्वदेशी अपनाएं, स्वाद भी बचाएं और संस्कार भी।
रक्षाबंधन की शुभकामनाएं!