एलएन पुरम शांतिनाथ संघ में हुआ संतो का चातुर्मास प्रवेश
बेंगलुरू : श्री शांतिनाथ जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ (ट्रस्ट) के तत्वावधान में एल. एन. श्रीरामपूरम बेंगलोर, जे.पी.पी. समणी भवन के प्रांगण में प. पू. मुनिराज राजपद्मसागरजी म. सा.,एवं प. पू. मुनि श्रमणपद्मसागरजी म. सा. का चातुर्मासिक प्रवेशोत्सव आयोजित हुआ। प्रन्यासप्रवर भक्तिरत्न विजयरत्न महाराज जी, मुनिराज भाग्यचन्द्र विजय जी, बाल मुनि भक्तिदर्शन विजय जी आदि ठाणा ३का सान्निध्य ने इस शोभा यात्रा में चार चाँद लगाये। पन्यासप्रवर भक्तिरत्न विजयरत्न महाराज जी ने भाग्य, अहोभाग्य, सौभाग्य, दुर्भाग्य इन चार शब्दों का विवेचन करते हुए फ़रमाया की संत का आना भाग्य, सन्निधि पाना अहोभाग्य, संत द्वारा याद करना सौभाग्य, सब मिलने के बावजूद भव ना सुधरे तो दुर्भाग्य होता है।इस स्वर्णिम चातुर्मास का पूरा लाभ उठाना है और अपने कर्मों की निर्जरा करनी है।
चातुर्मास हेतु पधारे प पू मुनिराज राजपद्मसागर जी ने अपने उपकारी सभी आचार्य भगवंतों के उपकार को मानते हुए अपने दीक्षा गुरु, संस्कार और ज्ञान प्रदाता गुरुदेव हेंद्रसागरसूरीश्वरजी महाराज साहब और अन्य मुनिवृदों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की। आज प्रत्यक्ष गुरु की भक्ति, गुरु की शक्ति और गुरु के आशीष से सब यहाँ आये है। सभी के समय का सदुपयोग होगा। हर क्षण हमें परमात्मा भक्ति में लीन रहना है और अपने जन्म को सफल बनाना है। उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि चातुर्मास यानी चार गति का निवारण करना है। मनुष्य गति, तिर्यंच गति, देव गति , नरक गति से बढ़कर सिद्ध गति है इस चातुर्मास में देव गुरु धर्म की आराधना का अवसर है। यह चातुर्मास का प्रवेश हम सबका सिद्ध गति की ओर का प्रवेश है। तप-त्याग से आगे बढ़ना है।
गुरु भगवंत ने सभी को आशीर्वाद देते हुए विनय,आदर,सम्मान से जीने की प्रेरणा दी। प्रति शनिवार, रविवार आध्यात्मिक पाठशाला में युवा वर्ग को अधिकाधिक इस चातुर्मास का लाभ उठाना है। कहानी के माध्यम से गुरुदेव ने इस जन्म की सार्थकता बतायी । प. पू. मुनि श्रमणपद्मसागरजी म. सा. आज का शुभ दिन एक मंगलक़ारी और यादगार दिन है। एक साथ एक ही छत के नीचे हम सब चातुर्मास का स्वागत कर रहे है। २३ वर्ष बाद इस पुण्य धरा पर चातुर्मास होना अपने आप में इतिहास है।मुख्य अतिथि पारस भंडारी ने बताया कि बेंगलोर नगरी घर्ममय बन गई, श्रीरामपुर संघ की एकता और अखंडता भी परिलक्षित हो रही है। गुरुदेव के पुण्य प्रताप से आज अधिकाधिक युवापीढ़ी यहाँ उपस्थित है।
सबमें होश के साथ जोश से काम करने की लगन है।सबकी चातुर्मास आराधना अच्छी तरह हो और यह एक यादगार चातुर्मास बने। श्रीरामपुर की धन्य धरा पर प्रभु श्री शांतिनाथ दादा की छत्र छाया में सागर समुदाय के प पू मुनिराज राजपद्मसागरजी म सा ठाणा दो का भव्यातिभव्य चातुर्मासिक प्रवेश शोभायात्रा का अद्भुत नज़ारा था। सकल संघ में हर्षोल्लास का वातावरण और गुरुदेव आशीषों की झड़ी बरसा रहे थे।शोभायात्रा में सम्मिलित सकल संघ की श्रद्धा, भक्ति, सेवा का अनुपम दृश्य देखनेलायक़ था। पूरे देश भर से समागत श्रद्धालुओं का अद्भुत मेला इस स्वागत सामैया की शोभा बढ़ा रहा था। केसरिया साफ़ा से सजा पूरा श्रीरामपुर का संघ मानो शांतिनाथ दादा की छत्र छाया में एक अनोखी छटा बिखेर रहा था। संचालक विपिन पोरवाल ने सबको भक्ति रंग में रंगा ।
स्वागत-सत्कार-अभिनंदन में जुड़े विमल शांति महिला मंडल,जैन शांति नवकार मंडल, श्री शांति नवकार बालिका मंडल, श्री गुरु सातम पूजा एवं सामायिक महिला मंडल, अपना एकता परिवार,पूनम सामायिक मंडल, आउवा जैन महिला मंडल आदि।शुभम् भव, श्रेयम् भव, कल्याणम भव की स्वर लहरियों से पूरा पंडाल परिसर गूंज उठा।एल.एन पुरम रा आँगने गुरुवर जी पधार्या आज.. सुंदर स्वर लहरियों के मंडलों ने अपनी श्रद्धाशिक्त अभिवंदना की।म्हारें आँगनिये में आज गुरुराज पधार्या..स्वर लहरियों पर बालिकाओं द्वारा अद्भुत स्वागत नृत्य प्रस्तुति दी। समस्त देश भर के श्रद्धालुओं से पुरा परिसर खचाख्रच भर गया। सभी पूज्य मुनिराज के दर्शन कर जयजयकार के नारे लगाये।
श्री संघ द्वारा एम एल ए अश्वथ नारायण का सम्मान किया गया एवं बाहर गाँव से पधारे अतिथियों का सम्मान किया। चेरमेन विरदीचंद आच्छा एवं शांतिलाल तथा अध्यक्ष विनोद सिंघवी ने सभी का स्वागत किया मंत्री नरेंद्र कुमार आच्छा ने व्यवस्था सँभाली। उपाध्यक्ष प्रसन्न चण्डालिया, कोषाध्यक्ष जवरी लाल मुथा, सज्जनराज बरलोटा, सहमंत्री चाँदमल भंसाली, सुरेश भंडारी, चेतन, पुनीत, विकास, सुरेंद्र, ताराचंद, सोहनलाल का सहयोग रहा। नरपतसिंह राजपूत परिवार द्वारा गुरुदेव को कांबली ओढ़ायी गई। पुखराज जीवराज जीरावला परिवार द्वारा गुरुपूजन किया गया।


