बेंगलुरू : अग्रहार दासरहल्ली स्थित रामदेव प्रार्थना मंदिर में रामदेव भक्त मंडल व सनातन धर्म के तत्वाधान में चातुर्मास आयोजित कार्यक्रम में संत महंत हरिदास महाराज ने प्रवचन में मीराबाई के कथा के दूसरे दिन कहा की मीराबाई के बालमन में कृष्ण की ऐसी छवि बसी थी कि किशोरावस्था से लेकर मृत्यु तक उन्होंने कृष्ण को ही अपना सब कुछ मान लिया। राव दूदा के पुत्र रतनसिंह की इकलौती पुत्री मीराबाई का जन्म सोलहवीं शताब्दी में हुआ था।
मीरा बाई का लालन-पालन मेड़ता सिटी में ही हुआ। बचपन से ही वह कृष्ण-भक्ति में रम गई थीं। मीरा बाई के बचपन के समय की एक कहावत के अनुसार एक दिन उनके महल के बाहर से एक बारात निकल रही थी । मीरा बाई भी परिवार के साथ झरोखे से बारात देख रही थीं। बारात को देख मीरा ने अपनी माता से पूछा कि मेरा दूल्हा कौन है? इस पर उनकी माता ने कृष्ण की मूर्ति की ओर इशारा करके कह दिया कि यही तुम्हारे दूल्हा हैं। तब से मीरा बाई भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन हो गई और अंत में उन्हीं में समा कर अमर हो गई।

हरिदास महाराज ने मीराबाई के प्रसिद्ध भजन ,पण घूँघरू बाँध मीरा नाची रे,..विष का प्याला राणाजी भेज्या पीवत मीरा हसी रे,..पायो जी म्हें राम रतन धन पायो, की मधुर भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं व माताओ बहनों को झूमने पर मजबूर कर दिया ।आज के कार्यक्रम के आरती एवं प्रसाद के लाभार्थी सुगन चंद चौहान, प्रियंका स्विस गियर रहे । वही तिलोक चंद जांगिड़ , बुधाराम जांगिड़,रामनिवास जांगिड़ नेमिचंद जांगिड़ ने व्यवस्था में सहयोग दिया ।वही महिलाओं में लीलादेवी सीरवी, परवाती , सरला देवी, सुमन पारिक ,किरण दाधिच ने व्यवस्था में सहयोग दिया । इस कार्यक्रम में रामदेव भक्त मंडल एवं सनातन धर्म के सभी सदस्य उपस्थित रहे।


