एक बार की बात है कि बगड़ी नगर के जोगेश्वर मठ में रात के समय चोर आ गए। मठ में पुजारी जी निवास करते थे ।
परंतु रात्रि का समय एवं चार चोरों के बीच अकेले पुजारी जी कैसे सामना कर सकते हैं अतः चोरों द्वारा चोरी करते देख लेने के बावजूद चोरों से भिड़ने की पुजारी जी द्वारा हिम्मत तो नहीं पड़ी बल्कि उस समय उन्हें भगवान जानराय जी का ध्यान आया पुजारी मन ही मन जानराय जी को पुकारने लगे एवं यह संकल्प किया की चोरों से यह धन बच जाता है अर्थात भगवान चोरों से यह धन यही छुड़वा लेते हैं तो इस धन का आधा भाग मैं कल सवेरे भगवान जानराय जी को भेंट कर दूंगा………………. JanRay Ji Bhagwan (Chamatkar) Shri Radhe Krishna Piplaad
चोरों ने बड़े इत्मीनान से चोरी की ।भगवान का गहना व चांदी के सिक्के लेकर जैसे ही मठ से चलने लगे कि चोरों को ऐसा लगा मानो वे अंधे हो गए हो । चोर पुनः मठ में मंदिर की तरफ मुड़े की फिर से दिखने लग गया ,फिर से मठ से बाहर जाने लगे कि पुनः अंधे हो गए ।
इस तरह काफी प्रयास बाद भी धन सहित चोरों का मठ से बाहर जाना सम्भव नही हुआ । तब उन्होंने समझ लिया कि यह देव चमत्कार है एवं अब हम यह धन नही ले जा पाएंगे व ऐसा ही प्रयास करते रहे तो दीवारों से टकरा टकराकर सिर फुट जाएंगे तथा दिन उग जाने से पकड़े भी जाएंगे । अतः चोर धन छोड़ कर भाग गए ….
मठ के पुजारी की कामना पूरी हो गई ।अतः सुबह होते ही चोरों द्वारा छोड़े गए धन का आधा घोड़े पर भरकर पुजारी जी पिपलाद श्री जानराय जी मंदिर पहुंचे एवं धन भगवान को भेंट कर दिया ।
पुजारी जी द्वारा मठ का धन पिपलाद जानराय जी भगवान को भेंट करने की सूचना बगड़ी नगर के ठाकुर साहब को मिली,सूचना पाकर ठाकुर साहब को बहुत क्रोध आया एवं तुरंत घोड़े पर सवार होकर धन पुनः लाने के लिए पिपलाद पहुँचे ।
JanRay Ji Bhagwan (Chamatkar) Shri Radhe Krishna Piplaad पिपलाद गाँव मे जैसे ही जानराय जी मंदिर के सामने चौराहे पर पहुँचे कि सामने कुछ बुर्जुग बैठे हुए मिले ।बुर्जगों से पूछताछ कर घोड़े पर बैठे हुए ही आगे बढ़ने लगे ,तब बैठे हुए बुर्जगों ने विनती की कि यहाँ से मोडा खड़ा है । इससे आगे भगवान के मंदिर की सीमा बंदी सुरु हो जाती है । अतः इस सीमा में कोई भी किसी सवारी पर बैठकर नही जाता है ।
इसलिए आप भी यहाँ पर घोड़े पर से उतर कर आगे मंदिर पधार जाओ ।ठाकुर साब को अपने आप पर बहुत गुमान था अतः और ज्यादा क्रोधित होकर अकड़ कर घोड़े को एड़ लगाई एवं घोड़े को आगे बढ़ाया ।
मंदिर के सामने बहुत पुराना एक नीम है , जो आज भी साक्षात है ,आप भी कभी मंदिर पधारो तो पहले आपको नीम का दर्शन होयेगा ।। ✍️ इस नीम के नीचे ज्यों ही ठाकुर साहब घोड़े पर विराजमान होकर पहुँचे कि पेड़ पर से एक बहुत बड़ा नाग ठीक ठाकुर साहब के ऊपर आकर अचानक गिरा ।तब ठाकुर साहब अचानक हुए इस हमले एवं अपने ऊपर आई मौत से डरकर घोड़े से नीचे गिर गये । घोड़ा भी एकदम कूद कर पुनः खड़ा हो गया,पर अब ठाकुर साहब घोड़े के नीचे एवं घोड़ा ऊपर ठाकुर साहब के चारों और चार पाँव किये खड़ा एवं सामने फन किये नाग देवता तथा उनसे आगे भगवान का मंदिर । ठाकुर साहब को लोगों ने कहा कि आप शीश नमन कर माफी माँगलो तथा मंदिर में स्थित कलश में कुछ राशि अपनी तरफ से भेंट कर दो ,भगवान माफ कर देंगे ।
ठाकुर साहब ने ऐसा ही किया भगवान जानराय जी के श्री चरणों में धोक देकर कलश में उस समय ग्यारह रुपये भेंट किये तथा यहाँ पर मठ के पुजारी द्वारा चढ़ाये धन को भूलने की बात स्वीकारी एवं साथ ही भगवान से मिले परचे स्वरूप जब तक जीवित रहेंगे प्रतिमाह 25/- पच्चीस रुपये भगवान को भेँट करने की कसम खाई । उसी धन से भगवान के चंदन चौक का निर्माण किया गया ।
अहम मिटाया ठाकुर साहब का,चमत्कार अपना दिव्य बताया।
JanRay Ji Bhagwan (Chamatkar) Shri Radhe Krishna Piplaad :
देव-भक्ति है जगत में,भगवान ने अहसास कराया ।।
इस तरह से कोई भी इंसान भगवान की बराबरी अथवा उससे आगे बढ़ने का यत्न करता है तो ईश्वर खुद-ब-खुद अवश्य चमत्कार दिखाते हैं ।।
नोट:-500 साल से अधिक पुराना नीम का वृक्ष आज भी दिव्य शक्ति के रूप में भगवान के मंदिर के पास है ,और भगवान को और भगवान के भक्तों को छाया प्रदान करता है ।।
जय बोलो जय जानराय जी भगवान की जय
JanRay Ji Bhagwan (Chamatkar) Shri Radhe Krishna Piplaad