निंबाहेड़ा। कृषि उपज मंडी समिति में बुधवार को आयोजित श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के प्रथम दिवस संत Digvijayram Ji Maharaj ने कथा का वाचन करते हुए कहा कि श्रीमद् भागवत कथा से भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और तत्व की प्राप्ति संभव है। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित के सभी भ्रम भी भागवत श्रवण से ही दूर हो सके थे।
भागवत श्रवण से मिलती है प्रभु भक्ति
संत दिग्विजयरामजी महाराज ने कहा कि भागवत वक्ता वैरागी और श्रोता प्रभु अनुरागी हो, तभी भक्ति सरिता प्रवाहित होने का आनंद प्राप्त होता है। उन्होंने भागवत के प्रथम श्लोक का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान सद् चित स्वरूप हैं, जिनके दर्शन मात्र से दैहिक सुख की प्राप्ति संभव है।

शुकदेव और वेदव्यास प्रसंग का किया वर्णन
कथा के दौरान उन्होंने भगवान शिव द्वारा माता पार्वती को अमर कथा सुनाने के प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि शुक सूत द्वारा कथा श्रवण करने पर भगवान शिव क्रोधित हो गए थे। इसके बाद शुक सूत वेदव्यास की पत्नी के मुख से गर्भस्थ होकर 12 वर्ष बाद बाहर आए और वनवास जाकर भागवत भक्ति में लीन हो गए।
उन्होंने 88 हजार ऋषियों को कथा श्रवण कराने वाले सूतजी का उल्लेख करते हुए कहा कि नींद और निंदा जीव के सबसे बड़े शत्रु हैं। इन पर विजय प्राप्त करने से ही प्रभु भक्ति और मोक्ष की प्राप्ति संभव है।
ज्ञान और वैराग्य का बताया महत्व
संत दिग्विजयरामजी ने सनकादिक कुमारों द्वारा भागवत श्रवण से ज्ञान और वैराग्य के पुनः युवा होने का प्रसंग सुनाया। उन्होंने आत्मदेव, धूंधूंली और गोकर्ण की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि गोकर्ण के ज्ञान से ही धूंधूकारी प्रेत योनि से मुक्त हो सका।
कथा के दौरान भक्त शिरोमणि Meerabai के भजनों का भी वाचन किया गया। प्रारंभ में श्री कल्लाजी की पूजा-अर्चना कर व्यासपीठ का पूजन किया गया। कथा विश्राम पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने व्यासपीठ की आरती की।

निकाली गई भव्य शोभायात्रा और कलश यात्रा
सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के तहत ठाकुरजी मंदिर से कथा स्थल तक भव्य शोभायात्रा और कलश यात्रा निकाली गई। इसमें करीब 100 गांवों की प्रभात फेरियां शामिल हुईं। कलश धारण किए महिलाएं, केसरिया बाना पहने वीर-वीरांगनाएं, वेद विद्यालय के बटुक, ऊंट-गाड़ियां, बैंड और 21 मालवी ढोल आकर्षण का केंद्र रहे।
शोभायात्रा में तुलसी, राधा-कृष्ण, वेदव्यासजी और सजीव बाहुबली हनुमान की झांकियां भी शामिल रहीं। यात्रा कल्लाजी मंदिर से प्रारंभ होकर विभिन्न मार्गों से होते हुए सोनी परिवार के आवास पहुंची, जहां तुलसी महारानी का विवाह ठाकुर शालिग्रामजी के साथ संपन्न कराया गया।
कई संगठनों ने किया स्वागत
यात्रा के दौरान विभिन्न सामाजिक संस्थाओं और संगठनों द्वारा पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। सुसज्जित बग्गी में संत दिग्विजयरामजी महाराज और ठाकुरजी का रथ आकर्षण का केंद्र रहा।
दूसरे दिन होंगे इन प्रसंगों के वाचन
श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस संत दिग्विजयरामजी महाराज दोपहर 1 बजे से कुंती स्तुति, भीष्म स्तुति, राजा परीक्षित को श्राप तथा शुकदेव मुनि के आगमन के प्रसंगों का वर्णन करेंगे।


